Ayodhya

राम मंदिर बनेगा ‘ग्रीन तीर्थ’… 70 फीसदी परिसर हरियाली को समर्पित, जल संरक्षण देगा मिसाल

पर्यावरण अनुकूल मॉडल के रूप में हो रहा मंदिर परिसर, हरित क्षेत्र, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, कमल सरोवर, एसटीपी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं दिखेंगीं

अनिल निषाद

अयोध्या, 4 जून 2026:

अयोध्या में विकसित हो रहा राम मंदिर परिसर अब केवल श्रद्धा और आस्था का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का भी राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर बढ़ रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करीब 70 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे परिसर को इस तरह डिजाइन किया है कि यहां धार्मिक गतिविधियों के साथ प्रकृति संरक्षण को भी प्राथमिकता मिले।

ट्रस्ट के अनुसार अधिग्रहीत 70 एकड़ भूमि में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हरियाली और खुले क्षेत्र के लिए सुरक्षित रखा गया है। केवल 30 से 35 प्रतिशत क्षेत्र में निर्माण कार्य किया गया है। परिसर की हरित व्यवस्था का दायित्व जीएमआर संस्था को सौंपा गया है, जिसने यहां रामायणकालीन पौधों, पंचवटी, नक्षत्र वाटिका और विभिन्न फलदार वृक्षों का रोपण कराया है। इसके साथ ही कई प्रकार की नर्सरियां भी विकसित की गई हैं।

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पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान परिसर में मौजूद करीब दो दर्जन पेड़ों को काटने के बजाय दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। इनमें से लगभग आधे पेड़ आज भी सुरक्षित और जीवित हैं। जो पेड़ स्थानांतरण के बाद सूख गए, उनकी जगह नए पौधे लगाए गए हैं ताकि हरित क्षेत्र का संतुलन बना रहे।

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जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में दो बड़े जलाशय विकसित किए जा रहे हैं। इनमें एक जलाशय सप्त मंडपम के मध्य बनाया गया है, जहां विभिन्न प्रजातियों के कमल लगाए जा रहे हैं। दूसरा गहरा जलाशय कुबेर नवरत्न टीला के पीछे तैयार किया जा रहा है। यहां तालाब की खुदाई और आंतरिक संरचना का कार्य जारी है।

मंदिर परिसर में दो आधुनिक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं। इनका संचालन बीवीजी इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। प्लांटों में शोधित जल का उपयोग बागवानी और हरित क्षेत्रों के रखरखाव में किया जाएगा। इसके अलावा वर्षा जल संचयन के लिए आधुनिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और 40 रिचार्ज पिट भी बनाए गए हैं।

स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भी व्यापक व्यवस्था की गई है। बीवीजी इंडिया लिमिटेड को राम मंदिर और परकोटे के मंदिरों की सफाई का जिम्मा दिया गया है, जबकि परिसर के अन्य हिस्सों और बाहरी क्षेत्रों की सफाई यूनिप्वाइंट और जिलाजीत संस्थाओं द्वारा की जा रही है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग एजेंसी नियुक्त की गई है।

राम मंदिर परिसर में विकसित की जा रही ये व्यवस्थाएं इसे केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हरित विकास, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन का जीवंत उदाहरण बना रही हैं। आने वाले समय में यह देश के अन्य बड़े धार्मिक परिसरों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन सकता है।

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