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LU में छात्रों का हल्ला बोल जारी, फीस वृद्धि पर आर-पार, बारिश भी नहीं डिगा सकी आंदोलन

सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज धरना स्थल पहुंचे, छात्रों की मांगों को बताया जायज, फीस वृद्धि वापसी, निष्कासन रद्द और छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग तेज

लखनऊ, 8 जुलाई 2026:

फीस वृद्धि वापस लेने, निष्कासित छात्रों की बहाली और छात्र संघ चुनाव बहाल करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को 37वें दिन भी जारी रहा। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन में छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। धरना स्थल पर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए फीस वृद्धि को तत्काल वापस लेने और निष्कासित साथियों की बहाली की मांग दोहराई।

धरने को उस समय राजनीतिक समर्थन भी मिला, जब समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों की मांगों को पूरी तरह जायज बताते हुए कहा कि इस मुद्दे को संसद में उठाने का प्रयास करेंगे और छात्रों के हितों की आवाज मजबूती से बुलंद करेंगे। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल फीस वृद्धि तक सीमित नहीं है बल्कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक माहौल बहाल करने की लड़ाई भी है। उनकी प्रमुख मांगों में फीस वृद्धि वापस लेना, निष्कासित छात्रों की वापसी, छात्र संघ चुनाव बहाल करना, विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस व्यवस्था समाप्त करना तथा शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए वॉल पेंटिंग और धरना स्थल को सुरक्षित करना शामिल है।
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धरने के दौरान तेज बारिश भी शुरू हो गई लेकिन खराब मौसम छात्रों के हौसले को नहीं डिगा सका। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए छात्र बारिश के बीच भी धरना स्थल पर डटे रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते रहे। आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना इसी तरह जारी रहेगा।

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आंदोलनकारी छात्रों को छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों, विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों के नेताओं का लगातार समर्थन मिल रहा है। गत दिनों धरनास्थल पर पहुंचे छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव समेत कई पूर्व पदाधिकारियों ने छात्रों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया था। बढ़ते राजनीतिक समर्थन के बीच लखनऊ विश्वविद्यालय का यह आंदोलन अब प्रदेश की राजनीति और छात्र संगठनों के लिए भी चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है।

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